8.1

संस्कृत

किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम । अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ॥

kiṃ tad brahma kim adhyātmaṃ kiṃ karma puruṣottama adhibhūtaṃ ca kiṃ proktam adhidaivaṃ kim ucyate

अनुवाद

अर्जुन ने कहा — हे पुरुषोत्तम, वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? अधिभूत किसे कहा गया है, और अधिदैव किसे कहते हैं?

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

अर्जुन एक के बाद एक तेज़ी से उन पारिभाषिक शब्दों की सूची रखकर बात शुरू करते हैं जिनका प्रयोग कृष्ण ने अध्याय 7 के अंत में बिना परिभाषा दिए किया था: ब्रह्म, अध्यात्म, कर्म, अधिभूत, अधिदैव। कृष्ण श्लोक 3-4 में इसी क्रम से इस सूची का उत्तर देते हैं, पर अध्याय का असली भार सातवें प्रश्न पर पड़ता है, जिसे श्लोक 2 के लिए रोक रखा गया है और जो मृत्यु के क्षण में होने वाली घटना के बारे में है — शेष उपदेश वास्तव में उसी प्रश्न के बारे में है, इस प्रश्न के बारे में नहीं। यहाँ के पाँचों शब्द सीधे गीता 7.29–गीता 7.30 से लिए गए हैं; यहाँ अर्जुन वह शब्दावली माँग रहे हैं जिसे कृष्ण ने आगे के लिए टाल दिया था। उत्तरों में चार श्लोक लगते हैं; उसके बाद का प्रश्न शेष पूरा अध्याय ले लेता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

kiṃ tad brahmaकिं तद् ब्रह्म
वह ब्रह्म क्या है? (kim + tat + brahma)
kim adhyātmaṃकिं अध्यात्मं
अध्यात्म क्या है? (kim + adhyātmam)
kiṃ karma puruṣottamaकिं कर्म पुरुषोत्तम
हे पुरुषोत्तम, कर्म क्या है? (kim + karma + puruṣottama)
adhibhūtaṃ ca kiṃ proktamअधिभूतं च किं प्रोक्तं
और अधिभूत किसे कहा गया है? (adhibhūtam + ca + kim + proktam)
adhidaivaṃ kim ucyateअधिदैवं किं उच्यते
अधिदैव किसे कहा जाता है? (adhidaivam + kim + ucyate)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Arjuna’s six-part question reads like technical due diligence, but notice what’s absent from this opening list: nothing here asks about death. That question shows up only in verse 2, appended almost as an afterthought to a technical inquiry — a familiar pattern where the real question surfaces only after the safer, more abstract ones have already been asked and cleared out of the way.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप किसी निर्णय के बारे में कई सावधान, तकनीकी प्रश्न पूछते हुए स्वयं को पाएँ, तो देखें कि कहीं उनके ठीक पीछे कोई अधिक ज़रूरी, अधिक कठिन प्रश्न तो नहीं छिपा है — असली प्रश्न अक्सर तभी सामने आता है जब सुरक्षित प्रश्न पूछे जा चुके हों और रास्ते से हट चुके हों।

व्यावसायिक

  • जब कोई हितधारक किसी बैठक की शुरुआत स्पष्टीकरण माँगने वाले प्रश्नों की लंबी सूची से करे, तो उस प्रश्न पर ध्यान दें जो सबसे अंत में या लगभग यूँ ही कही गई बात की तरह आता है — अक्सर वही असली चिंता होती है, और पहले के प्रश्न उस तक पहुँचने की तैयारी भर होते हैं।

परिवार और समाज

  • यदि आपका कोई निकट व्यक्ति उस प्रश्न तक पहुँचने से पहले, जो उसे वास्तव में परेशान कर रहा है, व्यावहारिक प्रश्नों की एक झड़ी लगा दे, तो पूरी सूची के दौरान धैर्य रखें — असली बातचीत आमतौर पर वही होती है जो सबसे अंत में आती है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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