8.22

संस्कृत

पुरुषः स परः पार्थ भक्त्या लभ्यस्त्वनन्यया । यस्यान्तःस्थानि भूतानि येन सर्वमिदं ततम् ॥

puruṣaḥ sa paraḥ pārtha bhaktyā labhyas tv ananyayā yasyāntaḥsthāni bhūtāni yena sarvam idaṃ tatam

अनुवाद

हे पार्थ, वह परम पुरुष, जिसके भीतर सभी प्राणी स्थित हैं और जिससे यह सब कुछ व्याप्त है, अनन्य भक्ति से ही प्राप्त होता है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह परम अक्षर कैसे प्राप्त होता है? अब तक बताए गए ब्रह्माण्डीय चक्रों या ध्यान की विधियों से नहीं, बल्कि अनन्य भक्ति से — अनन्यया भक्त्या। इस अध्याय में यह पहला स्पष्ट कथन है कि भक्ति ही प्राप्ति का वास्तविक साधन है। यह आगे अध्याय 9 और 12 में भक्ति के विस्तृत विवेचन का पूर्वसंकेत देता है, और श्लोक 23 से आरंभ होने वाली दो मार्गों की अधिक विस्तृत, तकनीकी शिक्षा की भूमिका बनाता है, जो विधि का नहीं बल्कि समय का वर्णन है। भक्त्या लभ्यस्त्वनन्यया — “केवल अनन्य भक्ति से प्राप्त होता है” — यही निर्णायक मोड़ है: सारी श्वास-साधना और ब्रह्माण्ड-विवेचन के बाद असली कुंजी एकनिष्ठ प्रेम है। अध्याय 9–12 इसी एक पंक्ति का विस्तार हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

puruṣaḥ sa paraḥ pārthaपुरुषः स परः पार्थ
हे पार्थ, वह परम पुरुष (puruṣaḥ + saḥ + paraḥ + pārtha)
bhaktyā labhyas tv ananyayāभक्त्या लभ्यस् त्व् अनन्यया
अनन्य भक्ति से ही प्राप्त होता है (bhaktyā + labhyaḥ + tu + ananyayā)
yasyāntaḥsthāni bhūtāniयस्यान्तःस्थानि भूतानि
जिसके भीतर सब प्राणी स्थित हैं (yasya + antaḥ-sthāni + bhūtāni)
yena sarvam idaṃ tatamयेन सर्वं इदं ततं
जिससे यह सब व्याप्त है (yena + sarvam + idam + tatam)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Twenty-one verses describe what akshara is and where it leads, and only this one answers how it’s actually reached — and the answer, undivided devotion, is far simpler than the breath-control and syllable-recitation described earlier in the chapter. The elaborate technique wasn’t the real requirement; it was one route among several to a destination that a single-pointed devotion can apparently reach on its own.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आपने किसी लक्ष्य की जटिल कार्यविधि की रूपरेखा बनाने में लंबा समय लगा दिया हो, तो जाँचिए कि क्या असली पहुँच का रास्ता उस पूरे तंत्र से सरल है जो आपने उसके चारों ओर खड़ा किया है — कभी-कभी निरंतर, एकनिष्ठ ध्यान उसके इर्द-गिर्द की विस्तृत तकनीक से कहीं अधिक वास्तविक काम करता है।

व्यावसायिक

  • किसी टीम-परिणाम को पाने के लिए एक विस्तृत प्रक्रिया तैयार करने के बाद यह पूछिए कि क्या एक सरल, अधिक सीधी प्रतिबद्धता — सबका एक ही स्पष्ट प्राथमिकता पर एकमत होना — आपको वहाँ उतनी ही विश्वसनीयता से पहुँचा देगी जितना वह तंत्र जो आपने जुटाया है।

परिवार और समाज

  • किसी रिश्ते को मज़बूत करने के लिए कई विस्तृत प्रयास आज़माने के बाद विचार कीजिए कि क्या अकेले स्थिर, अविभाजित ध्यान किसी भी एक तकनीक से अधिक कर पाएगा — कभी-कभी साथ निभाने का सबसे सरल रूप उसके इर्द-गिर्द किए गए अधिक विस्तृत प्रयासों से बेहतर परिणाम देता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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