संस्कृत
अनन्यचेताः सततं यो मां स्मरति नित्यशः । तस्याहं सुलभः पार्थ नित्ययुक्तस्य योगिनः ॥
ananyacetāḥ satataṃ yo māṃ smarati nityaśaḥ tasyāhaṃ sulabhaḥ pārtha nityayuktasya yoginaḥ
अनुवाद
हे पार्थ, जो अनन्य चित्त से निरंतर, सदा मेरा स्मरण करता है, उस नित्ययुक्त योगी के लिए मैं सहज ही सुलभ हूँ।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
श्लोक 12-13 की विस्तृत विधि के सामने एक कोमल प्रतिस्वर: जिसका चित्त बस अविभक्त और निरंतर लगा रहता है, उसके लिए कृष्ण तक पहुँचना सरल (सुलभः) बताया गया है। यह अध्याय इसी तरह कठोर यौगिक विधि और इस सरल दावे के बीच बारी-बारी से आता-जाता रहता है कि केवल स्थिर भक्ति ही पर्याप्त है — यह एक ऐसा तनाव है जिसे वह कभी पूरी तरह सुलझाता नहीं, और जिसकी ओर स्पष्ट रूप से भक्ति-केंद्रित अध्याय 9 और 12 और भी अधिक झुकते हैं। सु-लभ — “सहज ही प्राप्त” — वह शब्द है जो अभी बताई गई श्वास-और-अक्षर की विधि की कठिनाई को काट देता है: अनन्य-चेताः, अर्थात् अविचलित भक्त के लिए, मरते समय की किसी विशेष विधि की आवश्यकता नहीं है। अध्याय 12 इसी को अपना पूरा तर्क बना देता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- ananyacetāḥ satataṃअनन्यचेताः सततं
- अनन्य चित्त से, निरंतर (ananya-cetāḥ + satatam)
- yo māṃ smarati nityaśaḥयो मां स्मरति नित्यशः
- जो मुझे सदा स्मरण करता है (yaḥ + mām + smarati + nityaśaḥ)
- tasyāhaṃ sulabhaḥ pārthaतस्याहं सुलभः पार्थ
- उसके लिए मैं सुलभ हूँ, हे पार्थ (tasya + aham + su-labhaḥ + pārtha)
- nityayuktasya yoginaḥनित्ययुक्तस्य योगिनः
- नित्य युक्त योगी के लिए (nitya-yuktasya + yoginaḥ)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Right after two verses of elaborate, physiologically specific technique, this one says the goal is easy — sulabhah — for anyone whose attention is simply undivided. The chapter never picks a side between these two claims; it leaves the demanding method and the easy devotion standing next to each other, unreconciled, as if both are true depending on which capacity a person actually has.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- जब एक ही लक्ष्य के बारे में दो सलाहें आपस में विरोधी लगें — एक विस्तृत अनुशासन की माँग करे और दूसरी उसे सरल बताए — तो यह न मान लें कि उनमें से एक का गलत होना ज़रूरी है; हो सकता है कि अलग-अलग समय पर आपको सचमुच एक ही जगह तक पहुँचने के लिए अलग-अलग रास्तों की ज़रूरत हो।
व्यावसायिक
- जब आपकी टीम को परस्पर विरोधी मार्गदर्शन मिले — एक स्रोत से कठोर, भारी-भरकम प्रक्रिया और दूसरे से हल्का-फुल्का शॉर्टकट — तो किसी एक समाधान को ज़बरदस्ती थोपने से बचें; सैद्धांतिक रूप से अधिक सुथरा उत्तर चुनने के बजाय यह आँकें कि कौन-सा रास्ता वास्तव में आपकी टीम की वर्तमान क्षमता से मेल खाता है।
परिवार और समाज
- जब किसी रिश्ते को सँभालने के बारे में सलाहें आपस में टकराएँ — एक आवाज़ कहे कि इसके लिए कठिन, व्यवस्थित मेहनत चाहिए, दूसरी कहे कि बस लगातार साथ बने रहिए — तो भरोसा रखें कि अलग-अलग लोगों के लिए दोनों सच हो सकती हैं, और वह रूप चुनें जो उससे मेल खाता हो जिसे आप सचमुच निभा सकें।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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