संस्कृत
सर्वद्वाराणि संयम्य मनो हृदि निरुध्य च । मूर्ध्न्याधायात्मनः प्राणमास्थितो योगधारणाम् ॥
sarvadvārāṇi saṃyamya mano hṛdi nirudhya ca mūrdhny ādhāyātmanaḥ prāṇam āsthito yogadhāraṇām
अनुवाद
शरीर के सभी द्वारों को संयमित करके, मन को हृदय में रोककर और अपने प्राण को मस्तक में स्थापित करके, योग की धारणा में स्थित होकर,
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
श्लोक 11 में जिस “संक्षिप्त मार्ग” का वचन दिया गया था, वह एक क्रमबद्ध प्रत्याहार-प्रक्रिया निकलता है: इन्द्रियाँ बंद, मन हृदय में समेटा हुआ, प्राण को ऊपर सिर तक खींचा हुआ। यह शास्त्रीय प्रत्याहार है — इन्द्रियों को समेटना — जिसे सक्रिय रूप से धारण की जाने वाली चीज़ (योगधारणाम्) के रूप में बताया गया है, यानी निष्क्रिय अवस्था नहीं, बल्कि एक अनुशासन। और यह वाक्य सीधे आगे श्लोक 13 में जाकर पूरा होता है।
ये तीन चरण — द्वार बंद, मन हृदय में, प्राण शिखर तक — शास्त्रीय योग की धारणा, यानी एकाग्रता, हैं (ध्यान), जिन्हें यहाँ सचेत मृत्यु की नृत्य-संरचना की तरह मंचित किया गया है। श्लोक 13 इसे इसकी ध्वनि देता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- sarvadvārāṇi saṃyamyaसर्वद्वाराणि संयंय
- सभी द्वारों को संयमित करके (sarva-dvārāṇi + saṃyamya)
- mano hṛdi nirudhya caमनो हृदि निरुध्य च
- और मन को हृदय में रोककर (manaḥ + hṛdi + nirudhya + ca)
- mūrdhny ādhāyātmanaḥ prāṇamमूर्ध्न्य् आधायात्मनः प्राणं
- अपने प्राण को मस्तक में स्थापित करके (mūrdhni + ādhāya + ātmanaḥ + prāṇam)
- āsthito yogadhāraṇāmआस्थितो योगधारणां
- योग-धारणा में स्थित होकर (āsthitaḥ + yoga-dhāraṇām)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
The sequence described here — senses closed, mind gathered, breath drawn upward — looks from the outside like withdrawal, like doing less. The Sanskrit calls it yogadharanam, something actively held, not a default state the practitioner settles into. What looks like retreat from the world is, mechanically, one of the more effortful postures the chapter describes.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- स्थिरता को निष्क्रियता न समझें — ध्यान में या शांत मन के रूप में आप जिस शांति तक पहुँचना चाहते हैं, वह आम तौर पर सक्रिय रूप से बनाए रखी जाने वाली अवस्था है, कोई ऐसी स्वाभाविक स्थिति नहीं जिसमें आप बस कम करके अपने-आप पहुँच जाएँ; यह मानकर चलें कि इसमें सच्चा और लगातार प्रयास लगेगा।
व्यावसायिक
- किसी संकट की घड़ी में दबाव के बीच जो टीम शांत दिखती है, वह आम तौर पर उसी क्षण सबसे अधिक मेहनत कर रही होती है, ढीली नहीं पड़ी होती — संयम को कम प्रयास न समझें, वरना आप यह गलत आँकेंगे कि उस स्थिरता को बनाए रखने के लिए वास्तव में कितने सहयोग की ज़रूरत है।
परिवार और समाज
- तनाव के क्षण में जो माता-पिता या जीवनसाथी शांत और संतुलित रहते हैं, वे अक्सर उस संयम को थामे रखने के लिए सच्चा प्रयास कर रहे होते हैं, स्वभाव से बेपरवाह नहीं होते — यह मान लेने के बजाय कि शांत रहने में उनका कुछ नहीं लगता, उस प्रयास को देखें और उसे स्वीकार करें।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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