संस्कृत
नैते सृती पार्थ जानन्योगी मुह्यति कश्चन । तस्मात्सर्वेषु कालेषु योगयुक्तो भवार्जुन ॥
naite sṛtī pārtha jānan yogī muhyati kaścana tasmāt sarveṣu kāleṣu yogayukto bhavārjuna
अनुवाद
हे पार्थ, इन दोनों मार्गों को जानने वाला कोई भी योगी कभी मोहित नहीं होता। इसलिए हे अर्जुन, तुम सब समय योग में स्थित रहो।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
दोनों मार्गों का वर्णन करने के बाद कृष्ण इसका व्यावहारिक निष्कर्ष निकालते हैं: जो योगी इन्हें जानता है, वह इनसे कभी भ्रमित नहीं होता। संभवतः इसका अर्थ यह है कि यह ज्ञान ही अपनी मृत्यु का समय सही ढंग से साधने की हर चिंता को दूर कर देता है। इसके बाद आने वाला निर्देश, “सब समय योग में स्थिर रहो”, लगभग शब्दशः श्लोक 7 को दोहराता है, और इस तरह मृत्यु के क्षण से जुड़ी आरंभिक शिक्षा और बाद में आई इस अधिक विस्तृत ब्रह्माण्ड-व्यवस्था के बीच का घेरा पूरा कर देता है। सर्वेषु कालेषु योगयुक्तो भव — “सब समय योग से जुड़े रहो” — यह गीता 8.7 है, जो अध्याय की टेक बनकर लौटता है: मृत्यु से जुड़े हर प्रश्न का उत्तर वही स्थिर अभ्यास है, जिसे पूरे जीवन निभाया जाए। मार्गों को जान लेने से चिंता मिट जाती है, पर निर्देश नहीं बदलता।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- naite sṛtī pārtha jānanनैते सृती पार्थ जानन्
- हे पार्थ, इन दोनों मार्गों को जानते हुए (na + ete + sṛtī + pārtha + jānan)
- yogī muhyati kaścanaयोगी मुह्यति कश्चन
- कोई भी योगी मोहित नहीं होता (yogī + muhyati + kaścana)
- tasmāt sarveṣu kāleṣuतस्मात् सर्वेषु कालेषु
- इसलिए सभी समयों में (tasmāt + sarveṣu + kāleṣu)
- yogayukto bhavārjunaयोगयुक्तो भवार्जुन
- हे अर्जुन, योग में स्थित रहो (yoga-yuktaḥ + bhava + arjuna)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
“At all times, be firm in yoga” all but repeats verse 7’s “at all times think upon me” — the chapter’s opening instruction and its closing instruction are nearly the same sentence, spoken again only after an entire elaborate cosmology has been introduced in between. The repetition suggests the cosmology was never meant to replace the simple instruction, only to explain why it was worth giving in the first place.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- यदि आप पाते हैं कि अधिक जटिल तर्कों से होकर एक लंबा चक्कर लगाने के बाद आप लगभग उसी सलाह पर लौट आए हैं जिससे आपने शुरुआत की थी, तो यह इस बात का संकेत नहीं है कि वह चक्कर व्यर्थ गया — अक्सर शुरुआत में मिले सरल निर्देश पर सचमुच विश्वास करने के लिए यही ज़रूरी होता है।
व्यावसायिक
- जब कोई लंबी तकनीकी जाँच लगभग उसी सिफ़ारिश पर समाप्त होती है जिससे टीम ने शुरुआत की थी, तो उस जाँच को व्यर्थ प्रयास न मानें — अक्सर वही वह दृढ़ विश्वास और बारीक जानकारी देती है जो उस उत्तर के प्रति सचमुच प्रतिबद्ध होने के लिए चाहिए, जो शुरुआत में स्पष्ट-सा लग रहा था।
परिवार और समाज
- यदि किसी प्रियजन के साथ एक लंबी, कठिन बातचीत घूम-फिरकर लगभग उसी सलाह या अनुरोध पर लौट आती है जिससे आपने शुरुआत की थी, तो ज़रूरी नहीं कि यह आगे न बढ़ पाने की विफलता हो — कभी-कभी उस कठिन चर्चा से होकर गुज़रना ही वह चीज़ होती है जिससे मूल, सरल बात आख़िरकार सामने वाले के मन में उतरती है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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