संस्कृत
अक्षरं ब्रह्म परमं स्वभावोऽध्यात्ममुच्यते । भूतभावोद्भवकरो विसर्गः कर्मसंज्ञितः ॥
akṣaraṃ brahma paramaṃ svabhāvo'dhyātmam ucyate bhūtabhāvodbhavakaro visargaḥ karmasaṃjñitaḥ
अनुवाद
अविनाशी अक्षर परम ब्रह्म है; उसका स्वभाव अध्यात्म कहलाता है; और जो सृष्टि-विस्तार प्राणियों के भावों को उत्पन्न करता है, वह कर्म कहलाता है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
यहाँ से कृष्ण का उत्तर आरंभ होता है, और वक्ता का यह बदलाव महत्त्वपूर्ण है: यहाँ से श्लोक 4 तक वे अर्जुन की सूची को ठीक उसी क्रम में लेते हैं जिस क्रम में प्रश्न पूछे गए थे। ब्रह्म को अक्षर, अर्थात् अविनाशी, कहकर परिभाषित किया गया है — यह वह शब्द है जो श्लोक 20 से आगे अध्याय का असली विषय बन जाता है, इन आरंभिक परिभाषाओं के पूरा होने के काफ़ी बाद। ध्यान दें कि यहाँ “कर्म” को उसका सबसे संकीर्ण संभव अर्थ मिलता है: अध्याय 2 का निष्काम कर्म का नैतिक अनुशासन नहीं, बल्कि वह सृजनात्मक उत्सर्जन (विसर्ग) जो प्राणियों को अस्तित्व में लाता है — एक ही शब्द का एक भिन्न प्रयोग। अक्षर — “जिसका क्षय नहीं होता” — यहाँ एक परिभाषा के रूप में रखा जाता है और फिर छोड़ दिया जाता है; श्लोक 20–21 इसे अध्याय के वास्तविक गंतव्य के रूप में फिर से उठाते हैं। कर्म के रूप में विसर्ग ब्रह्मांडीय अर्थ है: वह प्रवाह जिससे एक संसार आरंभ होता है, न कि किसी व्यक्ति के कर्म।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- akṣaraṃ brahma paramaṃअक्षरं ब्रह्म परमं
- अक्षर ही परम ब्रह्म है (akṣaram + brahma + paramam)
- svabhāvo'dhyātmam ucyateस्वभावोऽध्यात्मं उच्यते
- अपना स्वभाव अध्यात्म कहलाता है (svabhāvaḥ + adhyātmam + ucyate)
- bhūtabhāvodbhavakaroभूतभावोद्भवकरो
- प्राणियों को अस्तित्व में लाने वाला (bhūta-bhāva-udbhava-karaḥ)
- visargaḥ karmasaṃjñitaḥविसर्गः कर्मसंज्ञितः
- यह विसर्ग कर्म कहलाता है (visargaḥ + karma-saṃjñitaḥ)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
The word karma appears here doing entirely different work than it does in chapter 2: there it named a whole ethical discipline of desireless action, here it names nothing more than the raw process of beings coming into existence. Krishna never flags the shift — the text simply trusts context to carry it, which means a reader importing the wrong sense of a familiar term from an earlier chapter will misread this one entirely.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप किसी शब्द का अर्थ बिना जाँचे एक संदर्भ से दूसरे संदर्भ में ले जाते हैं, तो इस पर ध्यान दें — "सफलता" जैसा शब्द किसी एक कठिन सप्ताह पर लागू होने पर कुछ और अर्थ रखता है और आपके पूरे जीवन पर लागू होने पर कुछ और, और एक अर्थ को दूसरे में ले आना चुपचाप आपके निर्णय को बिगाड़ देता है।
व्यावसायिक
- जब "पूरा हुआ" या "तैयार" जैसा कोई शब्द अलग-अलग टीमों में अलग-अलग सटीक अर्थों के साथ इस्तेमाल होता है, तो यह न मान लें कि एक ही शब्द का मतलब एक ही समझ है — उस सहमति पर आगे कुछ बनाने से पहले यह पक्का कर लें कि हर पक्ष उससे वास्तव में क्या अर्थ लेता है।
परिवार और समाज
- जब किसी निकट संबंध में "ठीक हूँ" या "व्यस्त हूँ" जैसा कोई शब्द बार-बार आता है, तो यह मान लेने के बजाय कि उसका वही सामान्य अर्थ है, यह जाँचें कि इस बार उसका वास्तव में क्या अर्थ है — एक ही शब्द इस पर निर्भर करते हुए कि वह कब कहा गया है, चुपचाप अलग-अलग बातें कह सकता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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