संस्कृत
ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन् । यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम् ॥
om ity ekākṣaraṃ brahma vyāharan mām anusmaran yaḥ prayāti tyajan dehaṃ sa yāti paramāṃ gatim
अनुवाद
जो 'ॐ' इस एक अक्षर वाले ब्रह्म का उच्चारण करते हुए और मेरा स्मरण करते हुए देह त्यागकर प्रयाण करता है, वह परम गति को प्राप्त होता है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
श्लोक 12 की विधि अब अपने विषय का नाम स्पष्ट रूप से लेती है: ॐ, जो ब्रह्म का एकाक्षर रूप है, और जिसका उच्चारण कृष्ण का स्मरण करते हुए किया जाता है। यहाँ दो सूत्र आकर मिलते हैं — श्लोक 3 में ब्रह्म को अक्षर, अर्थात् अविनाशी, बताया गया था, और ॐ उसी सत्य का ध्वनि-रूप है — साथ ही यह वचन भी है कि जो इस प्रकार देह त्यागता है वह “परम गति को प्राप्त होता है”। यह भाषा श्लोक 23 से आरम्भ होने वाले दो मार्गों के उपदेश की ओर पहले से संकेत करती है। ओम् इत्येकाक्षरं ब्रह्म — “ॐ, एकाक्षर ब्रह्म” — पवित्र अक्षर को उसी अक्षर का श्रव्य रूप बना देता है जिसकी परिभाषा श्लोक 3 में दी गई थी। अध्याय 17 इसे तत् और सत् के साथ जोड़ता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- om ity ekākṣaraṃ brahmaओं इत्य् एकाक्षरं ब्रह्म
- 'ॐ' — इस एकाक्षर ब्रह्म का (om + iti + eka-akṣaram + brahma)
- vyāharan mām anusmaranव्याहरन् मां अनुस्मरन्
- उच्चारण करते हुए, मेरा स्मरण करते हुए (vyāharan + mām + anusmaran)
- yaḥ prayāti tyajan dehaṃयः प्रयाति त्यजन् देहं
- जो देह त्यागकर प्रयाण करता है (yaḥ + prayāti + tyajan + deham)
- sa yāti paramāṃ gatimस याति परमां गतिं
- वह परम गति को प्राप्त होता है (saḥ + yāti + paramām + gatim)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
By this point “akshara” has been doing two jobs at once without announcing it: back in verse 3 it named the indestructible brahman, and now it also names the literal syllable, Aum. The chapter is quietly using the same word for a metaphysical claim and a physical practice — chanting a single sound as a way of holding the very reality that sound is said to indicate.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- ध्यान दें कि कब कोई शब्द या प्रतीक, जिसका आप रोज़ प्रयोग करते हैं, चुपचाप दोहरा काम कर रहा है — एक अवधारणा के रूप में भी और एक अभ्यास के रूप में भी। उस शब्द को बोलना उसी विचार को जीने का एक तरीका बन सकता है जिसका वह नाम है, और यह केवल आदतवश नहीं, बल्कि सोच-समझकर करने योग्य है।
व्यावसायिक
- किसी टीम की साझा शब्दावली — कोई नारा, कोई संक्षिप्त नाम — कभी-कभी अपने भीतर एक अवधारणा और एक अनकहा अभ्यास, दोनों लिए रहती है। उस अभ्यास को स्पष्ट कर दें, बजाय इसके कि अकेला शब्द ही लोगों को यह याद दिलाने का काम करे कि उससे क्या परिणाम निकलना चाहिए।
परिवार और समाज
- आपके परिवार में बार-बार दोहराया जाने वाला कोई वाक्य — भोजन से पहले की प्रार्थना, परिवार का कोई आदर्श-वाक्य — केवल एक विचार कहने से अधिक कुछ कर रहा हो सकता है। उसे बोलने को उस मूल्य का वास्तविक अभ्यास मानें जिसका वह नाम है, न कि केवल आदतन दोहराया जाने वाला वाक्य।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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