8.15

संस्कृत

मामुपेत्य पुनर्जन्म दुःखालयमशाश्वतम् । नाप्नुवन्ति महात्मानः संसिद्धिं परमां गताः ॥

mām upetya punarjanma duḥkhālayam aśāśvatam nāpnuvanti mahātmānaḥ saṃsiddhiṃ paramāṃ gatāḥ

अनुवाद

मुझे प्राप्त करके परम सिद्धि को पा चुके महात्मा फिर उस पुनर्जन्म को प्राप्त नहीं होते, जो दुःख का घर है और अनित्य है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

कृष्ण तक पहुँचने का फल स्पष्ट रूप से नकारात्मक शब्दों में बताया गया है: किसी वर्णित अवस्था की प्राप्ति के रूप में नहीं, बल्कि “दुःख के इस क्षणभंगुर घर” में लौटने से मुक्ति के रूप में। यही नकारात्मक प्रस्तुति अगले श्लोक के और तीखे विरोध की भूमिका बनाती है, जहाँ ब्रह्मा के लोक तक पहुँचना भी लौटने से मुक्त नहीं निकलता। दुःखालयम् अशाश्वतम् — “दुःख का अनित्य घर” — देहधारी अस्तित्व का गीता में सबसे निराशाजनक वर्णन है, और मोक्ष की परिभाषा बस इतनी है कि उसमें फिर लौटकर न आना। गीता 8.16 दाँव और ऊँचा कर देता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

mām upetya punarjanmaमां उपेत्य पुनर्जन्म
मुझे प्राप्त होकर, पुनर्जन्म (mām + upetya + punaḥ-janma)
duḥkhālayam aśāśvatamदुःखालयं अशाश्वतं
दुःखों का घर और अनित्य (duḥkha-ālayam + aśāśvatam)
nāpnuvanti mahātmānaḥनाप्नुवन्ति महात्मानः
महात्मा नहीं पाते (na + āpnuvanti + mahā-ātmānaḥ)
saṃsiddhiṃ paramāṃ gatāḥसंसिद्धिं परमां गताः
परम सिद्धि को प्राप्त हुए (saṃsiddhim + paramām + gatāḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Krishna could describe what the liberated state actually feels like; instead the payoff is defined entirely by what it isn’t — no return to “this transient home of pain.” Describing a destination by what a traveler will finally be free of, rather than by what awaits them, works because freedom from a known pain is easier to want clearly than an unfamiliar bliss is to picture.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब कोई लक्ष्य, जिसकी ओर आप काम कर रहे हैं, धुंधला लगे या उसमें प्रेरणा न जगे, तो उसे इस रूप में बताकर देखें कि आख़िरकार आप किस चीज़ से मुक्त हो जाएँगे — किसी अनजानी भावी स्थिति की कल्पना करने की तुलना में किसी जानी-पहचानी झुंझलाहट के दूर होने की चाह को स्पष्ट रूप से रखना प्रायः अधिक आसान होता है।

व्यावसायिक

  • जब आप किसी संशयी टीम के सामने कोई बदलाव रख रहे हों, तो लाभ को इस रूप में प्रस्तुत करना कि वह कौन-सी पीड़ा दूर करता है, नई सकारात्मक स्थिति का अमूर्त वर्णन करने की तुलना में प्रायः अधिक असर करता है — किसी अनजाने सुधार की तुलना में ठोस राहत की कल्पना करना और उसे चाहना अधिक आसान होता है।

परिवार और समाज

  • जब आप किसी को कठिन बदलाव से गुज़रने के लिए हिम्मत दे रहे हों, तो उस विशेष पीड़ा का नाम लेना जिससे वह आख़िरकार मुक्त हो जाएगा, उसकी जगह लेने वाली नई, अनजानी भलाई का वर्णन करने से अधिक प्रेरित कर सकता है — ठोस राहत को थामे रखना अधिक आसान होता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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