8.23

संस्कृत

यत्र काले त्वनावृत्तिमावृत्तिं चैव योगिनः । प्रयाता यान्ति तं कालं वक्ष्यामि भरतर्षभ ॥

yatra kāle tv anāvṛttim āvṛttiṃ caiva yoginaḥ prayātā yānti taṃ kālaṃ vakṣyāmi bharatarṣabha

अनुवाद

हे भरतश्रेष्ठ, अब मैं तुम्हें वह काल बताऊँगा जिसमें प्रयाण करने वाले योगी लौटकर नहीं आते, और वह काल भी जिसमें प्रयाण करने वाले योगी लौटकर आते हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

कृष्ण अब उस विषय की घोषणा करते हैं जो अध्याय के शेष भाग में चलेगा: मृत्यु का समय, न कि केवल उस क्षण की मानसिक विषयवस्तु, यह निर्धारित करता है कि योगी लौटता है या नहीं। यह श्लोक 5-7 के “आप किसके बारे में सोचते हैं” से “आप कब जाते हैं” की ओर स्वर का परिवर्तन है, जो दो मार्गों के उस सिद्धांत का परिचय देता है जिसे श्लोक 24-26 प्रस्तुत करते हैं। स्वर का यह परिवर्तन क्या से कब की ओर है: अंतिम विचार से प्रस्थान की ऋतु और घड़ी की ओर। अध्याय के पृष्ठ पर दिया गया चित्र दोनों मार्गों को साथ-साथ रखकर दिखाता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

yatra kāle tv anāvṛttimयत्र काले त्व् अनावृत्तिं
जिस काल में, अनावृत्ति को (yatra + kāle + tu + anāvṛttim)
āvṛttiṃ caiva yoginaḥआवृत्तिं चैव योगिनः
और आवृत्ति को भी, योगी (āvṛttim + ca + eva + yoginaḥ)
prayātā yānti taṃ kālaṃप्रयाता यान्ति तं कालं
प्रयाण करके प्राप्त होते हैं, उस काल को (prayātāḥ + yānti + tam + kālam)
vakṣyāmi bharatarṣabhaवक्ष्यामि भरतर्षभ
मैं बताऊँगा, हे भरतश्रेष्ठ (vakṣyāmi + bharata-ṛṣabha)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The chapter has spent everything so far on mental content — what you think of, how steadily you hold it. This verse abruptly changes the variable under discussion to timing — when you go — without pausing to reconcile the two. It’s worth noticing that the text lets two different explanatory frameworks for the same outcome sit side by side without ever being asked to agree with each other.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप यह समझने की कोशिश कर रहे हों कि आपके जीवन में कोई चीज़ ठीक क्यों नहीं चल रही, तो ध्यान दें कि कहीं आप दो अलग-अलग व्याख्यात्मक ढाँचों के बीच बार-बार आ-जा तो नहीं रहे — एक आपकी मानसिकता, दूसरा बाहरी समय या परिस्थिति — और उनमें तालमेल बिठाए बिना। दोनों आंशिक रूप से सच हो सकते हैं, लेकिन उन्हें आपस में मिला देने से आपकी प्रतिक्रिया उलझ जाएगी।

व्यावसायिक

  • किसी बार-बार होने वाली विफलता का कारण खोजते समय यह स्पष्ट रखें कि आप इस समय किस कारक की बात कर रहे हैं — प्रक्रिया का अनुशासन या बाहरी समय अथवा परिवेश — क्योंकि बातचीत के बीच में बिना बताए एक व्याख्यात्मक ढाँचे से दूसरे पर चले जाने से ऐसी बहस पैदा होती है जो कभी वास्तव में सुलझती नहीं।

परिवार और समाज

  • परिवार में बार-बार उभरने वाले किसी तनाव पर बात करते समय यह स्पष्ट रखें कि आप कौन-सी व्याख्या दे रहे हैं — किसी व्यक्ति की मानसिकता, या उसके आसपास का समय और परिस्थितियाँ — क्योंकि बातचीत के बीच चुपचाप एक से दूसरी पर चले जाने से सामने वाले के लिए यह जानना कठिन हो जाता है कि आप वास्तव में क्या कह रहे हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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