संस्कृत
हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते । सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत ॥
hṛṣīkeśaṃ tadā vākyam idam āha mahīpate senayor ubhayor madhye rathaṃ sthāpaya me'cyuta
अनुवाद
हे पृथ्वीपति, तब अर्जुन ने हृषीकेश से यह वचन कहा — हे अच्युत, मेरे रथ को दोनों सेनाओं के बीच खड़ा कीजिए।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
इस अध्याय में अर्जुन पहली बार बोलते हैं, और उनका सबसे पहला अनुरोध — जो वे कृष्ण को “अच्युत”, यानी अडिग रहने वाले, कहकर संबोधित करते हैं — बस इतना है कि उन्हें दोनों सेनाओं के ठीक बीच में खड़ा कर दिया जाए। यह युद्ध-नीति का एक साधारण-सा अनुरोध है, पर यही पूरे अध्याय का निर्णायक मोड़ बन जाता है: पास से देखने का वही स्थान उस संकट को जन्म देता है जिसका वर्णन श्लोक 26 से आगे किया गया है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- hṛṣīkeśaṃहृषीकेशं
- हृषीकेश को
- tadāतदा
- तब
- vākyam idamवाक्यं इदं
- यह वचन
- āhaआह
- कहा
- mahī-pateमही-पते
- हे पृथ्वीपति
- senayor ubhayor madhyeसेनयोः उभयोः मध्ये
- दोनों सेनाओं के बीच
- rathaṃरथं
- रथ को
- sthāpayaस्थापय
- खड़ा कीजिए
- me'cyutaमेऽच्युत
- मेरे लिए, हे अच्युत
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Of everything Arjuna could have said as his first line in the entire text — a battle cry, an order, a boast — he asks instead to be positioned so he can see clearly. A person’s first words in a high-stakes moment often reveal what they actually need before anything else does: here, it’s sight, not action.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- किसी गंभीर और निर्णायक स्थिति की शुरुआत में ध्यान दें कि आपका सहज पहला कदम वास्तव में क्या होता है — अक्सर वह कुछ करने से पहले स्थिति को स्पष्ट रूप से देखने की ज़रूरत होती है, और उस सहज प्रवृत्ति पर भरोसा करना आमतौर पर सही होता है।
व्यावसायिक
- किसी बड़े दाँव वाली परियोजना पर काम शुरू करने में जल्दबाज़ी करने से पहले, सबसे पहले यह माँगें कि आप जिस चीज़ से वास्तव में जूझ रहे हैं, उसकी यथासंभव सबसे स्पष्ट तस्वीर मिले — अर्जुन के पहले कदम की तरह, यह टालमटोल नहीं, बल्कि कामों का सही क्रम है।
परिवार और समाज
- परिवार की किसी गंभीर और निर्णायक स्थिति में प्रतिक्रिया देने से पहले, यह माँगें कि पहले आप सचमुच समझ सकें कि क्या हो रहा है — कुछ करने से पहले स्पष्ट रूप से देखने की चाह वाली सहज प्रवृत्ति ही आमतौर पर भरोसे लायक होती है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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