1.2

संस्कृत

दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा । आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत् ॥

dṛṣṭvā tu pāṇḍavānīkaṃ vyūḍhaṃ duryodhanas tadā ācāryam upasaṅgamya rājā vacanam abravīt

अनुवाद

संजय ने कहा: तब पाण्डवों की सेना को व्यूह में खड़ी देखकर राजा दुर्योधन आचार्य के पास गया और यह वचन बोला।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

संजय का वर्णन यहीं से आरंभ होता है, और यह वृत्तांत अर्जुन से नहीं, बल्कि दुर्योधन से शुरू होता है, जो युद्ध छिड़ने से पहले पाण्डवों की सेना को देखता है और अपने गुरु द्रोण के पास जाता है। इस अध्याय की संरचना पर ध्यान देना उपयोगी है: दुर्योधन का अपना चिंता से भरा कथन यहाँ से श्लोक 11 तक चलता है, और उसके बाद वर्णन फिर से दोनों सेनाओं की समग्र स्थिति पर लौटता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

dṛṣṭvāदृष्ट्वा
देखकर
tuतु
तो
pāṇḍavānīkaṃपाण्डवानीकं
पाण्डवों की सेना को
vyūḍhaṃव्यूढं
व्यूह में सजी हुई
duryodhanasदुर्योधनस्
दुर्योधन ने
tadāतदा
तब
ācāryamआचार्यं
आचार्य द्रोण के
upasaṅgamyaउपसङ्गंय
पास जाकर
rājāराजा
राजकुमार
vacanamवचनं
यह वचन
abravītअब्रवीत्
कहा

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The Gita’s dramatic opening doesn’t actually belong to Arjuna — it belongs to Duryodhana, whose anxious accounting of forces frames everything for eleven verses before Arjuna even appears. Whoever is most unsettled in a room often speaks first and longest, and that can quietly set the room’s tone well before the person who will actually matter most gets a word in.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • ध्यान दें कि कब आपकी मनःस्थिति वास्तविक परिस्थिति से नहीं, बल्कि उस व्यक्ति से तय हो रही है जो बातचीत में सबसे पहले और सबसे अधिक चिंतित होकर बोला — शुरुआत में सबसे ऊँची आवाज़ अपने-आप सबसे सच्चा आकलन नहीं होती।

व्यावसायिक

  • जब कोई बैठक किसी एक चिंतित हितधारक की प्रस्तुति से शुरू हो, तो उसे पूरी चर्चा की मूल कहानी न बनने दें — इससे पहले कि पूरा कमरा किसी और की घबराहट में ढल जाए, सोच-समझकर बात को तथ्यों पर वापस लाएँ।

परिवार और समाज

  • किसी पारिवारिक मेल-मिलाप में ध्यान दें कि कब किसी एक चिंतित व्यक्ति की शुरुआती टिप्पणी बाकी सबके लिए भावनात्मक माहौल तय कर देती है — आप चाहें तो उसे अपनाने से इनकार कर सकते हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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