5.18

संस्कृत

विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि । शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः ॥

vidyāvinayasampanne brāhmaṇe gavi hastini śuni caiva śvapāke ca paṇḍitāḥ samadarśinaḥ

अनुवाद

ब्राह्मण जो विद्या और विनय से सम्पन्न है, उसमें, गाय में, हाथी में, और कुत्ते में तथा चाण्डाल में भी ज्ञानी जन समान दृष्टि रखते हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह सूची जाति के प्रति सजग पाठक को जानबूझकर विचलित करने के लिए रची गई है: सामाजिक व्यवस्था के शिखर पर बैठा एक विद्वान, विनम्र ब्राह्मण, फिर एक गाय, एक हाथी, एक कुत्ता, और अंत में एक श्वपाक — एक बहिष्कृत, जो उस समय कल्पना की जा सकने वाली सबसे निचली सामाजिक स्थिति थी — इन सबका नाम एक ही साँस में, एक ही सम दृष्टि के विषयों के रूप में लिया गया है। समदर्शिनः, “समान देखने वाले”, यही निर्णायक शब्द है, और यह स्पष्ट रूप से समझ लेना उचित है कि यह क्या दावा नहीं करता: यह नहीं कि ये प्राणी सामाजिक भूमिका में एक जैसे हैं, बल्कि यह कि ज्ञानी लोग भेद करने वाले लक्षणों — विद्या, प्रजाति, पद — के पार उस चीज़ को देखते हैं जो इन सबके बीच बदलती नहीं। यह वही समता है जिसे अध्याय 2 ने स्थितप्रज्ञ के इर्द-गिर्द गढ़ा था, अर्थात् वह स्थिर बुद्धि वाला व्यक्ति जिसे सुखद और दुखद का खिंचाव छू नहीं पाता; पर अब इसका लक्ष्य विशेष रूप से यह है कि व्यक्ति दूसरे प्राणियों को कैसे देखता है, न कि वह अपने भाग्य के प्रति कैसी प्रतिक्रिया करता है। सम-दर्शन — “समान देखना” — गीता 2.48 का समत्व है जो बाहर की ओर मुड़ गया है: वही समभाव, जो अब लाभ और हानि के बजाय व्यक्तियों पर लागू होता है। गीता 6.29 इसकी सकारात्मक विषय-वस्तु बताता है — सर्वत्र एक ही आत्मा का दर्शन।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

vidyāvinayasampanneविद्याविनयसंपन्ने
विद्या और विनय से सम्पन्न (vidyā-vinaya-sampanne)
brāhmaṇeब्राह्मणे
ब्राह्मण में
gaviगवि
गाय में
hastiniहस्तिनि
हाथी में
śuni caiva śvapāke caशुनि चैव श्वपाके च
और कुत्ते में तथा चाण्डाल में भी (śuni + ca + eva + śvapāke + ca)
paṇḍitāḥ samadarśinaḥपण्डिताः समदर्शिनः
ज्ञानी जन समदृष्टि रखते हैं (paṇḍitāḥ + sama-darśinaḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The four items in this list aren’t a random assortment — they’re arranged in a deliberate descent, from the learned brāhmaṇa at the top of the social order down through cow, elephant, and dog, to the outcaste at the very bottom, before the verse asserts the sage sees them all the same. The reader is walked step by step down the hierarchy, made to feel the distance travelled, before being told the distance was never real to begin with — a structural choice, not just a list of examples.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • ध्यान दें कि आपका अपना मन चुपचाप किस खास क्रम में लोगों को ऊँचा-नीचा आँकता है — हैसियत, उपलब्धि, निखार — और पूछिए कि इस क्रम को अलग रख देने पर वास्तव में क्या बचता है। यह क्रम अक्सर लोगों में मौजूद किसी वास्तविक चीज़ के बारे में कम, और आपके ध्यान देने की आदतों के बारे में ज़्यादा बताता है।

व्यावसायिक

  • जब आप ऐसे सहकर्मियों का मूल्यांकन करें जिनके बीच हैसियत का अंतर साफ़ दिखता हो — पद, वरिष्ठता, पृष्ठभूमि — तो उनके वास्तविक योगदान को आँकने से पहले जान-बूझकर मन में उस क्रम में ऊपर से नीचे तक उतरिए, ठीक वैसे ही जैसे यह श्लोक पाठक को सामाजिक क्रम में नीचे तक ले जाता है और फिर उसे मिटा देता है।

परिवार और समाज

  • यदि आप पाएँ कि आप किसी अनकहे क्रम के आधार पर परिवार के सदस्यों के साथ अलग-अलग व्यवहार कर रहे हैं — कमाई, शिक्षा, जन्म का क्रम — तो यह तय करने से पहले कि क्या वास्तव में यही क्रम आपके व्यवहार को तय करे, उस क्रम को स्पष्ट शब्दों में नाम दीजिए।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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