14.4

संस्कृत

सर्वयोनिषु कौन्तेय मूर्तयः संभवन्ति याः । तासां ब्रह्म महद्योनिरहं बीजप्रदः पिता ॥

sarvayoniṣu kaunteya mūrtayaḥ sambhavanti yāḥ tāsāṃ brahma mahad yonir ahaṃ bījapradaḥ pitā

अनुवाद

हे कौन्तेय, सभी योनियों में जो भी शरीर उत्पन्न होते हैं, उन सबकी योनि महान ब्रह्म है और मैं बीज देने वाला पिता हूँ।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यहाँ श्लोक 3 को सामान्य रूप दिया गया है: कोई प्राणी चाहे जो भी रूप ले, चाहे जिस भी योनि से जन्मे, उसकी उत्पत्ति वही दो भागों वाली है — प्रकृति सार्वभौमिक योनि के रूप में और कृष्ण बीज देने वाले पिता के रूप में। इसके साथ सृष्टि-उत्पत्ति की यह प्रस्तावना पूरी होती है। यह स्थापित कर देने के बाद कि हर देहधारी प्राणी का तत्त्व प्रकृति से आता है, अब अध्याय वह प्रश्न उठा सकता है जिसकी उसे वास्तव में चिंता है: प्रकृति से मिले उस तत्त्व में ऐसा क्या है जो उसके भीतर रहने वाले प्राणी को बाँधता है? श्लोक 5 इसका सीधा उत्तर देता है। “किसी भी योनि में जो भी रूप जन्म लेते हैं” — पक्षी, वृक्ष, देवता, मनुष्य — सबकी माता प्रकृति है और कृष्ण बीजप्रद पिता, अर्थात् बीज देने वाले पिता हैं। यह कथन गीता 14.3 को एक साथ सभी जीव-जातियों पर लागू करके सार्वभौमिक बना देता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

sarvayoniṣu kaunteyaसर्वयोनिषु कौन्तेय
हे कुन्तीपुत्र, सभी योनियों में (sarva-yoniṣu + kaunteya)
mūrtayaḥ sambhavanti yāḥमूर्तयः संभवन्ति याः
जो भी शरीर उत्पन्न होते हैं (mūrtayaḥ + sambhavanti + yāḥ)
tāsāṃ brahma mahad yonirतासां ब्रह्म महद् योनिः
उन सबकी योनि महद् ब्रह्म है (tāsām + brahma + mahat + yoniḥ)
ahaṃ bījapradaḥ pitāअहं बीजप्रदः पिता
मैं बीज देने वाला पिता हूँ (aham + bīja-pradaḥ + pitā)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Having stated the dual origin once in verse 3, Krishna doesn’t move on — he generalizes it to every possible womb, every kind of birth, before letting the subject change. That’s a deliberate sequencing choice: nail the principle down as universal first, and only then ask what actually follows from it, in verse 5. Rushing to consequence before generalizing would have left an exception somewhere for a listener to hide in.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • अपने व्यवहार में दिखे किसी नियम पर अमल करने से पहले जाँच लें कि वह सचमुच हर स्थिति में लागू होता है या नहीं, सिर्फ़ उस एक स्थिति में नहीं जिससे वह सूझा था। जिस सिद्धांत को आपने अभी सब पर लागू करके नहीं देखा, उसमें उस अपवाद के छिपने की जगह बची रहती है जिसे आप बनाए रखना चाहेंगे।

व्यावसायिक

  • किसी एक घटना के आधार पर समाधान सुझाने से पहले पक्का कर लें कि उसके पीछे का पैटर्न आपके सिस्टम के हर मिलते-जुलते मामले में सही बैठता है। अगर मूल कारण बहुत संकीर्ण रूप में बताया जाए, तो वही विफलता किसी ऐसी जगह फिर से हो सकती है जिसे आपने जाँचा ही नहीं।

परिवार और समाज

  • किसी एक असहमति से सबक निकालकर उसे आगे लागू करने से पहले जाँच लें कि वह रिश्ते की अलग-अलग परिस्थितियों में सचमुच सही बैठता है या नहीं, सिर्फ़ उस एक बात में नहीं जिस पर आप अभी नाराज़ हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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