14.11

संस्कृत

सर्वद्वारेषु देहेऽस्मिन्प्रकाश उपजायते । ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत ॥

sarvadvāreṣu dehe'smin prakāśa upajāyate jñānaṃ yadā tadā vidyād vivṛddhaṃ sattvam ity uta

अनुवाद

जब इस शरीर के सभी द्वारों में प्रकाश और ज्ञान उत्पन्न होता है, तब यह जानना चाहिए कि सत्त्व बढ़ गया है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह पहला निदान-संकेत है, जो श्लोक 13 तक चलने वाली त्रयी का आरंभ करता है: बढ़ता हुआ सत्त्व “शरीर के सब द्वारों” से प्रवाहित होते प्रकाश और समझ के रूप में प्रकट होता है — इन्द्रियाँ ध्यान भटकाने के बजाय स्पष्टता के मार्ग बनकर काम करती हैं। यह अमूर्त नहीं, व्यावहारिक है: यहाँ कृष्ण अर्जुन को सिखा रहे हैं कि वह अपनी भीतरी अवस्था को उसी तरह पढ़े जैसे कोई वैद्य लक्षणों को पढ़ता है।

कौन-सा गुण प्रबल है, इसका उसके अनुभव होने वाले लक्षण से निदान कैसे करें: सत्त्व शरीर के हर “द्वार” (इन्द्रिय) पर प्रकाश और समझ के रूप में दिखता है। गीता 14.12 और गीता 14.13 रजस् और तमस् के लक्षण बताते हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

sarvadvāreṣu dehe'sminसर्वद्वारेषु देहेऽस्मिन्
इस देह के सभी द्वारों में (sarva-dvāreṣu + dehe + asmin)
prakāśa upajāyateप्रकाश उपजायते
प्रकाश उत्पन्न होता है (prakāśaḥ + upajāyate)
jñānaṃ yadā tadā vidyādज्ञानं यदा तदा विद्याद्
और ज्ञान — जब, तब जानना चाहिए (jñānam + yadā + tadā + vidyāt)
vivṛddhaṃ sattvam ity utaविवृद्धं सत्त्वं इत्य् उत
कि सत्त्व बढ़ गया है (vivṛddham + sattvam + iti + uta)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The test given here isn’t a feeling to introspect for, it’s something observable through “all the gates of the body” at once — the senses collectively lit up with clarity, not just a private mental sense of well-being. That’s a meaningfully different kind of instruction than “notice if you feel harmonious”; it’s closer to a checklist run across every channel simultaneously than a mood you either happen to catch or don’t.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • आप अच्छी स्थिति में हैं या नहीं, इसके किसी धुँधले-से एहसास पर भरोसा करने के बजाय कोई ठोस और देखी जा सकने वाली चीज़ जाँचिए — क्या इस समय आपके जीवन के हर क्षेत्र में आपका ध्यान स्पष्ट है, या किसी एक में पैना और बाकी सबमें धुँधला? एक वास्तविक संकेत उस मनोदशा से कहीं बेहतर है जिसकी शायद आप केवल कल्पना कर रहे हों।

व्यावसायिक

  • कोई परियोजना ठीक चल रही लगती है या नहीं, यह पूछने के बजाय उसके हर हिस्से में एक साथ कोई ठोस संकेत जाँचिए — कोड की गुणवत्ता, घटनाओं की दर, टीम का मनोबल, ग्राहकों की प्रतिक्रिया। कहीं अच्छा, कहीं बुरा — ऐसा बिखरा हुआ मिश्रण उस एक धारणा से कहीं अधिक ईमानदार आकलन है जो पूरे का स्थान ले लेती है।

परिवार और समाज

  • घर में सब ठीक है, इस सामान्य एहसास पर भरोसा करने के बजाय एक साथ कुछ ठोस, देखे जा सकने वाले संकेत जाँचिए — सबकी नींद कैसी है, आपस में बातचीत कैसी है, सब एक-दूसरे के साथ कैसे खड़े होते हैं। एक अकेला अच्छा पल कई दूसरे माध्यमों के चुपचाप बुझते जाने को ढक सकता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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