संस्कृत
ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्त्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसाः । जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसाः ॥
ūrdhvaṃ gacchanti sattvasthā madhye tiṣṭhanti rājasāḥ jaghanyaguṇavṛttisthā adho gacchanti tāmasāḥ
अनुवाद
जो सत्त्व में स्थित हैं, वे ऊपर की ओर जाते हैं; राजसी लोग मध्य में ठहरते हैं; और सबसे निकृष्ट गुण की वृत्तियों में स्थित तामसी लोग नीचे की ओर जाते हैं।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
अध्याय के वर्णनात्मक आधे भाग का यह अंतिम अंश श्लोक 14-17 में बताई गई गतियों को स्थान के रूप में प्रस्तुत करता है: सत्त्व में स्थित लोग ऊपर उठते हैं, रजस् में स्थित लोग बीच में रहते हैं, तमस् में स्थित लोग नीचे डूबते हैं। अब जब गुणों की परिभाषा (5-9) दी जा चुकी है, उनके लक्षण (11-13) बताए जा चुके हैं और उनके परिणामों का खाका (14-18) खींचा जा चुका है, तो अध्याय ने बंधन का उसके सभी रूपों में पूरा वर्णन कर दिया है। श्लोक 19 वर्णन से मुक्ति की ओर मुड़ता है — और ध्यान देने की बात है कि यह मुक्ति “और अधिक सात्त्विक बनना” नहीं है, क्योंकि श्लोक 6 में ही दिखाया जा चुका है कि सत्त्व भी उतनी ही निश्चितता से बाँधता है जितना अन्य दो। एक ही श्लोक में ऊर्ध्वाधर ब्रह्मांड-व्यवस्था: सत्त्व ऊपर, रजस् बीच में, तमस् नीचे। वर्णनात्मक खंड का अंत — गीता 14.19 गुणों का वर्णन करने से हटकर उनसे बाहर निकलने की ओर मुड़ता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- ūrdhvaṃ gacchanti sattvasthāऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्त्वस्था
- सत्त्व में स्थित लोग ऊपर जाते हैं (ūrdhvam + gacchanti + sattva-sthāḥ)
- madhye tiṣṭhanti rājasāḥमध्ये तिष्ठन्ति राजसाः
- राजसी लोग बीच में रहते हैं (madhye + tiṣṭhanti + rājasāḥ)
- jaghanyaguṇavṛttisthāजघन्यगुणवृत्तिस्था
- सबसे निम्न गुण की वृत्तियों में स्थित (jaghanya-guṇa-vṛtti-sthāḥ)
- adho gacchanti tāmasāḥअधो गच्छन्ति तामसाः
- तामसी लोग नीचे जाते हैं (adhaḥ + gacchanti + tāmasāḥ)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
After thirteen verses of careful analysis, the guna teaching’s descriptive payoff comes down to just three destinations — up, middle, down. It would be easy to read this as the finish line, the reward for having sorted out which guna dominates you. Instead it’s a deliberate false summit: verse 19 immediately reveals that even the highest of these three rankings, rising through sattva, is still a rank within bondage, not an exit from it.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप आत्म-सुधार के किसी ढाँचे के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच जाएँ — किसी जानी-पहचानी श्रेणी-व्यवस्था का सबसे अनुशासित, सबसे सद्गुणी रूप — तो स्वयं से पूछिए कि क्या आप सचमुच मूल समस्या से बाहर निकल आए हैं, या केवल उसी के भीतर उपलब्ध सबसे अच्छे दर्जे तक चढ़ गए हैं।
व्यावसायिक
- जब आप अंततः किसी व्यवस्था की मौजूदा रैंकिंग में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों की श्रेणी तक पहुँच जाएँ, तो जाँचिए कि क्या उस व्यवस्था में ही अब भी कोई ऊपरी सीमा बनी हुई है — किसी टूटे हुए ढाँचे के भीतर सबसे अच्छा प्रदर्शन करना उस ढाँचे से आगे निकल जाने के समान नहीं है।
परिवार और समाज
- जब आप किसी ऐसे पारिवारिक माहौल में 'सबसे धैर्यवान' या 'सबसे सँभले हुए' व्यक्ति बन जाएँ जो मूल रूप से अब भी तनावपूर्ण है, तो ध्यान दें कि किसी बुरे ढर्रे के भीतर सबसे ऊँचा स्थान पाना उस ढर्रे से ही बाहर निकल जाने के समान नहीं है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
स्वयं से पूछें
इस श्लोक को पढ़ने से आगे ले जाने के कुछ तरीके। टिक और नोट इसी ब्राउज़र में रहते हैं।