14.13

संस्कृत

अप्रकाशोऽप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च । तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे कुरुनन्दन ॥

aprakāśo'pravṛttiś ca pramādo moha eva ca tamasy etāni jāyante vivṛddhe kurunandana

अनुवाद

हे कुरुनन्दन, जब तमोगुण बढ़ता है, तब अप्रकाश, अप्रवृत्ति, प्रमाद और मोह भी उत्पन्न होते हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

तीसरा पहचान-चिह्न, जो श्लोक 11 से आरंभ हुई त्रयी को पूरा करता है: तमस् के बढ़ने पर अंधकार, जड़ता, असावधानी और मोह प्रकट होते हैं — जो श्लोक 11 के फैलते प्रकाश के ठीक विपरीत है। तीनों लक्षण-समूह सामने आ जाने के बाद श्लोक 14 पर अध्याय का स्वर फिर बदलता है — दैनिक जीवन में किसी गुण के उभार को कैसे पहचानें, इससे हटकर इस पर कि जब मृत्यु के क्षण में कोई विशेष गुण प्रधान हो, तब क्या होता है। तमस् की पहचान बाकी दोनों का निषेध है: अप्रकाश (प्रकाश का अभाव — सत्त्व की स्पष्टता के विपरीत), अप्रवृत्ति (क्रिया का अभाव — रजस् की प्रेरणा के विपरीत), और साथ में प्रमाद तथा मोह। मंदता और धुंध। इसका फल स्वयं अज्ञान है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

aprakāśo'pravṛttiś caअप्रकाशोऽप्रवृत्तिश् च
प्रकाश का अभाव और प्रवृत्ति का अभाव (aprakāśaḥ + apravṛttiḥ + ca)
pramādo moha eva caप्रमादो मोह एव च
प्रमाद और मोह भी (pramādaḥ + mohaḥ + eva + ca)
tamasy etāni jāyanteतमस्य् एतानि जायन्ते
तमोगुण में ये उत्पन्न होते हैं (tamasi + etāni + jāyante)
vivṛddhe kurunandanaविवृद्धे कुरुनन्दन
बढ़ जाने पर, हे कुरुनन्दन (vivṛddhe + kuru-nandana)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Verse 11 opened with light; this verse opens with its direct negation, no-light — and rajas’s symptoms sit literally between the two in verse 12. The three verses aren’t just a list, they’re built as a spectrum with sattva and tamas as the bracketing extremes and rajas as the restless middle, which mirrors the destinies verse 18 will later assign each: up, middle, down.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप अपनी स्थिति को समझने की कोशिश कर रहे हों, तो इसे तीन अलग-अलग खानों के बजाय एक क्रम की तरह देखें — एक छोर पर स्पष्टता, दूसरे छोर पर जड़ता, और बीच में बेचैनी — और उस पर ज़बरदस्ती कोई एक ठप्पा लगाने के बजाय यह पहचानिए कि आप उस रेखा पर कहाँ हैं।

व्यावसायिक

  • टीम की स्थिति का आकलन करते समय उसे सिर्फ़ स्वस्थ या अस्वस्थ कह देने से बचें, और इसके बजाय टीम को एक क्रम पर रखकर देखें — स्पष्ट और जुड़ी हुई से लेकर बेचैन और बिखरी हुई तक, और फिर जड़ और उदासीन तक। टीम उस रेखा पर कहाँ है, यह जानकर ही आपको पता चलता है कि वास्तव में किस तरह का हस्तक्षेप उचित है।

परिवार और समाज

  • किसी रिश्ते का हाल परखते समय अच्छे या बुरे का एक ही फ़ैसला सुनाने के बजाय एक क्रम के रूप में सोचिए — स्पष्ट और जुड़ा हुआ, बेचैनी भरी व्यस्तता के बावजूद दूर-दूर, या चुपचाप ठहरा हुआ; उस रेखा का हर बिंदु एक अलग प्रतिक्रिया माँगता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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