17.7

संस्कृत

आहारस्त्वपि सर्वस्य त्रिविधो भवति प्रियः । यज्ञस्तपस्तथा दानं तेषां भेदमिमं शृणु ॥

āhāras tv api sarvasya trividho bhavati priyaḥ yajñas tapas tathā dānaṃ teṣāṃ bhedam imaṃ śṛṇu

अनुवाद

हर व्यक्ति को अपनी रुचि के अनुसार प्रिय लगने वाला आहार भी तीन प्रकार का होता है, और इसी तरह यज्ञ, तप और दान भी। उनका यह भेद सुनो।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह एक संक्रमणकालीन श्लोक है, जो अध्याय के शेष भाग की विषय-सूची का काम भी करता है: पहले भोजन, फिर यज्ञ, तप और दान, इन सभी को बारी-बारी से सत्त्व, रजस् और तमस् के आधार पर परखा जाएगा। गीता ब्रह्मांड-विज्ञान और नीति के लिए जिस गुण-ढाँचे का प्रयोग दूसरी जगहों पर करती है, उसी ढाँचे में भोजन जैसे साधारण विषय को भी परखने को तैयार है। यह अध्याय 14 के सर्वव्यापी दृष्टिकोण की विशेषता है: साधारण जीवन का कोई भी क्षेत्र तीन गुणों की दृष्टि से बाहर नहीं है। यहाँ अध्याय की पद्धति की घोषणा होती है: पाँच चीज़ों की वही एक सूची है, यानी भोजन, यज्ञ, तप, दान और (गीता 17.4 से) उपासना। इनमें से हर एक को उसके पीछे की श्रद्धा के आधार पर तीन भागों में बाँटा गया है। आगे जो आता है, वह मूल रूप से एक वर्गीकरण है, जिसे चित्र एक तालिका के रूप में प्रस्तुत करता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

āhāras tv api sarvasyaआहारस् त्व् अपि सर्वस्य
सभी का आहार भी (āhāraḥ + tu + api + sarvasya)
trividho bhavati priyaḥत्रिविधो भवति प्रियः
रुचि के अनुसार तीन प्रकार का होता है (trividhaḥ + bhavati + priyaḥ)
yajñas tapas tathā dānaṃयज्ञस् तपस् तथा दानं
और यज्ञ, तप तथा दान भी (yajñaḥ + tapaḥ + tathā + dānam)
teṣāṃ bhedam imaṃ śṛṇuतेषां भेदं इमं शृणु
उनका यह भेद सुनो (teṣām + bhedam + imam + śṛṇu)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Few verses in the Gita are this openly metatextual — Krishna essentially pauses the teaching to hand Arjuna a table of contents, naming all four categories and the order they’ll arrive in before starting the first one. That transparency changes how the next fifteen verses should be read: not as fifteen separate lessons but as one lesson, the guna test, run four times — and knowing that in advance is itself part of the teaching.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

इस श्लोक को अपनाएँ

पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप एक ही मूल सिद्धांत के कई उदाहरणों पर स्वयं विचार करने वाले हों, तो शुरू में ही तय कर लें कि वे कितने हैं और उनमें साझा क्या है — आगे आने वाली बात का ढाँचा पहले से जान लेने पर आप हर अलग उदाहरण को कहीं अधिक उपयोगी ढंग से ग्रहण करते हैं।

व्यावसायिक

  • किसी बहु-भागीय समीक्षा या ऑडिट में उतरने से पहले, ढाँचा और श्रेणियाँ शुरू में ही बता दें, जैसा यह श्लोक करता है — पहले से बताई गई रूपरेखा अलग-अलग निष्कर्षों की सूची को एक ही मूल कसौटी के बार-बार दोहराए गए प्रदर्शन में बदल देती है।

परिवार और समाज

  • जब आप एक साथ कई स्थितियों पर अपनी प्रतिक्रिया (फ़ीडबैक) देने वाले हों, तो पहले उस पैटर्न का नाम लें — 'मैं एक ही बात को कुछ अलग-अलग तरीकों से बता रहा हूँ' — ताकि वह अलग-अलग शिकायतों की लड़ी के बजाय एक सुसंगत सीख के रूप में पहुँचे।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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