17.22

संस्कृत

अदेशकाले यद्दानमपात्रेभ्यश्च दीयते । असत्कृतमवज्ञातं तत्तामसमुदाहृतम् ॥

adeśakāle yad dānam apātrebhyaś ca dīyate asatkṛtam avajñātaṃ tat tāmasam udāhṛtam

अनुवाद

जो दान अनुचित स्थान और समय पर, अयोग्य व्यक्तियों को, बिना सत्कार के और तिरस्कारपूर्वक दिया जाता है, वह तामस कहा गया है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

तामसिक दान उन सभी शर्तों को बस उलट देता है जो श्लोक 20 ने सात्त्विक दान के लिए रखी थीं — गलत स्थान, गलत समय, गलत पात्र, और सम्मान के बजाय तिरस्कार के साथ दिया गया दान। इसके साथ चौथा और अंतिम त्रिक (आहार, यज्ञ और तप के बाद) पूरा होता है, और अध्याय का वर्णनात्मक सर्वेक्षण भी पूरा हो जाता है। इसके बाद अगले श्लोक में अध्याय ॐ तत् सत् सूत्र की ओर मुड़ता है, जो इस पूरे वर्गीकरण को एक ही तात्त्विक आधार से फिर जोड़ देता है। तामसिक दान हर पहलू के प्रति लापरवाह होता है — गलत समय, गलत स्थान, गलत पात्र — और वह अवज्ञातम्, यानी “तिरस्कार के साथ”, दिया जाता है: दान अर्पित नहीं किया जाता, फेंका जाता है। देने का ढंग उस दान को गिरा देता है जो वह अपने सार में हो सकता था।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

adeśakāle yad dānamअदेशकाले यद् दानं
अनुचित स्थान और समय पर जो दान (adeśa-kāle + yat + dānam)
apātrebhyaś ca dīyateअपात्रेभ्यश् च दीयते
और अयोग्य व्यक्तियों को दिया जाता है (apātrebhyaḥ + ca + dīyate)
asatkṛtam avajñātaṃअसत्कृतं अवज्ञातं
बिना सत्कार के, तिरस्कारपूर्वक (asat-kṛtam + avajñātam)
tat tāmasam udāhṛtamतत् तामसं उदाहृतं
वह तामस कहा गया है (tat + tāmasam + udāhṛtam)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

There’s an echo here of verse 15’s rule for speech — that truth alone isn’t enough, it also has to be delivered kindly. This verse applies the same logic to giving: even a gift given at the wrong time to an unworthy recipient could conceivably still be excused as a mistake of judgment, but asatkṛtam avajñātam, given disrespectfully and contemptuously, makes the manner of delivery, not just the substance of the gift, part of what the guna grade actually measures.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • आप कुछ किस ढंग से देते हैं, यह उतना ही मायने रखता है जितना यह कि आप देते हैं या नहीं — साफ़ दिखती तिरस्कार की भावना या अनिच्छा के साथ किया गया उपकार उस चीज़ की भलाई को ही मिटा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे कठोरता से कहा गया सच ईमानदारी के मूल्य को मिटा देता है।

व्यावसायिक

  • सही, यहाँ तक कि उदार फ़ीडबैक भी, अगर पाने वाले के प्रति साफ़ दिखते तिरस्कार के साथ दी जाए, तो उसका बहुत-सा मूल्य समाप्त हो जाता है — यदि देने का ढंग अनादर प्रकट करता है, तो आप किसी सहकर्मी को जो दे रहे हैं, उसकी सामग्री उतनी मायने नहीं रखती जितना आप सोचते हैं।

परिवार और समाज

  • परिवार के किसी सदस्य की मदद करते हुए यह जता देना कि आपको ऐसा करना अखर रहा है, या कि मदद की ज़रूरत पड़ने के कारण आप उन्हें कमतर समझते हैं, आपकी उतनी सद्भावना खो सकता है जितनी मदद न करने से भी न खोती — देने का ढंग भी उतना ही काम करता है जितना स्वयं दान।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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