संस्कृत
यज्ञे तपसि दाने च स्थितिः सदिति चोच्यते । कर्म चैव तदर्थीयं सदित्येवाभिधीयते ॥
yajñe tapasi dāne ca sthitiḥ sad iti cocyate karma caiva tadarthīyaṃ sad ity evābhidhīyate
अनुवाद
यज्ञ, तप और दान में जो दृढ़ स्थिति है, उसे भी 'सत्' कहा जाता है, और उसी के लिए किया गया कर्म भी 'सत्' ही कहलाता है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
यह श्लोक पूरे अध्याय को फिर से एक साथ समेट देता है: ठीक उन्हीं तीन क्षेत्रों में — यज्ञ, तप और दान — जिनकी श्रेणियाँ श्लोक 11-22 में बताई गई हैं, स्थिति अर्थात् दृढ़ता को स्वयं “सत्” कहा जाता है। इसी तरह तदर्थीयम्, यानी “उसके” (तत्, अर्थात् ब्रह्म के) लिए किया गया हर कर्म भी “सत्” कहलाता है। यहाँ “अच्छाई” की नई परिभाषा दी जा रही है। अब यह कोई अलग-थलग गुण नहीं रह जाती जो किसी कर्म में या तो होता है या नहीं होता। इसका अर्थ है अपने कर्म को निरंतर परम की ओर अर्पित करते रहना। ठीक यही बात इस अध्याय में देखी गई हर श्रेणी के सात्त्विक रूप को बाकी रूपों से अलग करती थी। स्थिति — “दृढ़ता से टिके रहना” — यज्ञ, तप और दान में सत् है; और तदर्थीयम्, यानी “उसके लिए [अर्थात् ब्रह्म के लिए]” किया गया हर कर्म भी सत् है। यह अक्षर कर्मकाण्ड से आगे फैलकर समर्पित कर्म के पूरे क्षेत्र को अपने में समेट लेता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- yajñe tapasi dāne caयज्ञे तपसि दाने च
- यज्ञ, तप और दान में (yajñe + tapasi + dāne + ca)
- sthitiḥ sad iti cocyateस्थितिः सद् इति चोच्यते
- जो स्थिति है, वह भी 'सत्' कहलाती है (sthitiḥ + sat + iti + ca + ucyate)
- karma caiva tadarthīyaṃकर्म चैव तदर्थीयं
- और उसके लिए किया गया कर्म भी (karma + ca + eva + tat-arthīyam)
- sad ity evābhidhīyateसद् इत्य् एवाभिधीयते
- 'सत्' ही कहा जाता है (sat + iti + eva + abhidhīyate)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Sthiti, steadfastness, is a word about consistency over time, not about any single instance — and its appearance here quietly reframes the entire chapter’s project. Every earlier verse graded one act at a time, this sacrifice, this gift, this act of austerity, but verse 27 says the real measure of Sat is steadiness across all of them, repeated: the guna of a single offering matters less than whether that quality holds up across a lifetime of offerings.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- नेक इरादे से किया गया एक अकेला काम अपने आप में बहुत कुछ साबित नहीं करता — जैसा यह श्लोक बताता है, असली कसौटी यह है कि समय के साथ बार-बार दोहराए जाने पर भी वही गुण स्थिर बना रहता है या नहीं। अपने आप को अपने सबसे अच्छे एक उदाहरण से नहीं, बल्कि अपने व्यवहार के ढर्रे से परखिए।
व्यावसायिक
- एक अच्छी तरह पूरी की गई परियोजना से किसी टीम का वास्तविक स्तर तय नहीं होता — कई परियोजनाओं में बनी रहने वाली स्थिरता से होता है। जब आप यह आँक रहे हों कि कोई तौर-तरीका सचमुच जड़ पकड़ चुका है या नहीं, तो किसी एक बढ़िया उदाहरण को श्रेय देने के बजाय कुछ समय तक बनी रहने वाली निरंतरता देखें।
परिवार और समाज
- किसी प्रियजन के लिए किया गया एक बड़ा काम उतना मायने नहीं रखता जितना स्थिर रूप से बार-बार किए गए छोटे-छोटे काम — इस श्लोक का पूरा समापन-तर्क यही है कि भलाई को समय के साथ बनी निरंतरता से मापा जाता है, किसी एक शिखर-क्षण से नहीं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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