17.24

संस्कृत

तस्मादोमित्युदाहृत्य यज्ञदानतपःक्रियाः । प्रवर्तन्ते विधानोक्ताः सततं ब्रह्मवादिनाम् ॥

tasmād oṃ ity udāhṛtya yajñadānatapaḥkriyāḥ pravartante vidhānoktāḥ satataṃ brahmavādinām

अनुवाद

इसलिए ब्रह्मवादी लोग विधान में बताई गई यज्ञ, दान और तप की क्रियाएँ सदा ‘ॐ’ का उच्चारण करके आरम्भ करते हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह उन तीन श्लोकों में पहला है, जिनमें से प्रत्येक “ॐ तत् सत्” का एक-एक अक्षर लेकर उसका कर्मकाण्डीय प्रयोजन समझाता है। ॐ आरम्भ का सूचक है: ब्रह्मवादी — “ब्रह्म का प्रतिपादन करने वाले”, वे लोग जो परम सत्य को ध्यान में रखकर बोलते और कर्म करते हैं — यज्ञ, दान और तप के हर विहित कर्म का आरम्भ इसी से करते हैं। यह अमूर्त धर्मशास्त्र नहीं, बल्कि व्यावहारिक उपासना-विधि है: एक वाचिक संकेत, जो किसी साधारण कर्मकाण्डीय कर्म को, उस कर्म के शुरू होने से पहले ही, परम सत्य की ओर मोड़ देता है। ॐ कर्म का आरम्भ करता है — यह ब्रह्म की ध्वनि है (गीता 8.13, गीता 10.25) — और यज्ञ, दान या तप को एक निजी लेन-देन से बदलकर एक अर्पण बना देता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

tasmād oṃ ity udāhṛtyaतस्माद् ओं इत्य् उदाहृत्य
इसलिए 'ॐ' का उच्चारण करके (tasmāt + om + iti + udāhṛtya)
yajñadānatapaḥkriyāḥयज्ञदानतपःक्रियाः
यज्ञ, दान और तप की क्रियाएँ (yajña-dāna-tapaḥ-kriyāḥ)
pravartante vidhānoktāḥप्रवर्तन्ते विधानोक्ताः
विधान में कही गई, आरम्भ होती हैं (pravartante + vidhāna-uktāḥ)
satataṃ brahmavādināmसततं ब्रह्मवादिनां
ब्रह्मवादियों की सदा (satatam + brahma-vādinām)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The word doing the real work here is satatam, always, invariably, not just when the moment feels significant. The verse isn’t describing an occasional gesture of intention but an unconditional habit: every single prescribed act, without exception, opens the same way. The reorientation toward the Absolute isn’t left to whether the practitioner remembers to feel reverent that day; it’s built into the act’s opening syllable regardless of mood.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जो अनुष्ठान आप मनःस्थिति की परवाह किए बिना हर बार करते हैं, वह आपके लिए उस सार्थक भाव-संकेत से कहीं अधिक करता है जो आपको तभी याद आता है जब आपका मन हो — इस आदत को बिना शर्त बनाइए, क्योंकि सही भाव महसूस करने के लिए याद रखने पर निर्भर रहना पूरे उद्देश्य को ही विफल कर देता है।

व्यावसायिक

  • जो सुरक्षा-जाँच या कोड-समीक्षा का चरण समय न होने पर छोड़ दिया जाता है, वह उस चरण की तुलना में बहुत कम सुरक्षा देता है जो सचमुच बिना शर्त हो — किसी आरंभिक अनुष्ठान का मूल्य ठीक उसकी निरंतरता से आता है, न कि इससे कि उसे केवल तभी किया जाए जब वह आवश्यक लगे।

परिवार और समाज

  • परिवार के साथ कोई छोटा-सा अनुष्ठान — एक फ़ोन कॉल, हालचाल पूछना — इसलिए अधिक मायने रखता है कि वह बिना शर्त हो, इसलिए नहीं कि वह हर बार विशेष रूप से सार्थक हो; निरंतरता अपने आप में ही मूल्य है, न कि किसी अवसर विशेष पर उसे महत्त्वपूर्ण महसूस कराने के लिए याद रखना।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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