17.21

संस्कृत

यत्तु प्रत्युपकारार्थं फलमुद्दिश्य वा पुनः । दीयते च परिक्लिष्टं तद्दानं राजसं स्मृतम् ॥

yat tu pratyupakārārthaṃ phalam uddiśya vā punaḥ dīyate ca parikliṣṭaṃ tad dānaṃ rājasaṃ smṛtam

अनुवाद

परन्तु जो दान बदले में उपकार पाने के लिए, या फिर फल की इच्छा से, और क्लेशपूर्वक दिया जाता है, वह दान राजस माना गया है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

राजसिक दान ठीक उसी कसौटी पर विफल होता है जिस पर सात्त्विक दान खरा उतरा था: वह बदले में कुछ पाने की अपेक्षा से दिया जाता है, या अनिच्छा से (परिक्लिष्टम्, शाब्दिक अर्थ “क्लेश के साथ” — देते समय देने पर ही मन में खीझ रखते हुए)। इसमें अनिच्छा का यह जोड़ एक उपयोगी ब्यौरा है, जिसे यह क्रम पहले इतनी स्पष्टता से नहीं दिखा पाया था — यहाँ रजस् तीव्रता या अति उतना नहीं है, जितना उदारता का चोला पहने लेन-देन का हिसाब-किताब। राजसिक दान बदले में कुछ पाने की अपेक्षा रखता है — प्रत्युपकार (बदले में किया जाने वाला उपकार) या फल (पुण्य) — और परिक्लिष्टम्, “अनिच्छा से, कष्ट के साथ” किया जाता है। उपहार के वेश में छिपा एक लेन-देन।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

yat tu pratyupakārārthaṃयत् तु प्रत्युपकारार्थं
परन्तु जो बदले में उपकार पाने के लिए (yat + tu + pratyupakāra-artham)
phalam uddiśya vā punaḥफलं उद्दिश्य वा पुनः
अथवा फिर फल को लक्ष्य करके (phalam + uddiśya + vā + punaḥ)
dīyate ca parikliṣṭaṃदीयते च परिक्लिष्टं
और क्लेशपूर्वक दिया जाता है (dīyate + ca + parikliṣṭam)
tad dānaṃ rājasaṃ smṛtamतद् दानं राजसं स्मृतं
वह दान राजस माना गया है (tat + dānam + rājasam + smṛtam)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Two quite different personalities get grouped under this single guna: the person calculating a future return, and the person giving only because they felt cornered into it (parikliṣṭam — with distress). One is scheming, the other resentful; they don’t feel like the same kind of giver at all. But both share the one thing rajas actually tracks here — the gift never escapes the giver’s own ledger, whether that ledger is tallying a future gain or resenting a present loss.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • आप चाहे बदले में कुछ मिलने की उम्मीद से दे रहे हों, या मन मारकर इसलिए कि आपको लगता है आपके पास कोई और रास्ता नहीं, जाँचिए कि क्या दोनों एक ही जगह से तो नहीं आ रहे — भीतर का एक हिसाब-किताब, जिसे आपने अभी तक नीचे नहीं रखा। सच्ची उदारता के लिए उस हिसाब-किताब को बंद करना ज़रूरी है, केवल यह चुनना नहीं कि उसके किस पक्ष पर ध्यान दें।

व्यावसायिक

  • एक सहकर्मी जो आगे चलकर श्रेय मिलने की उम्मीद में मदद करता है, और दूसरा जो माँगे जाने पर साफ़ नाराज़गी दिखाते हुए मदद करता है — दोनों एक-दूसरे के उलट लगते हैं, पर दोनों भीतर एक ही हिसाब-किताब चला रहे हैं। ध्यान रखिए कि आपकी टीम के लोगों की एक-दूसरे के प्रति उदारता कहीं असल में छिपा हुआ लेखा-जोखा तो नहीं।

परिवार और समाज

  • परिवार को देते हुए मन ही मन बाद में कृतज्ञता की उम्मीद रखना, और देते हुए इस बात से नाराज़ रहना कि देना ही पड़ रहा है — ये दो विपरीत मनोदशाएँ लग सकती हैं, पर इनके नीचे एक ही खुला हुआ हिसाब-किताब होता है। यह तय करने से पहले कि आपका देना सचमुच निःस्वार्थ था, देखिए कि आप इनमें से कौन-सा चला रहे हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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