15.13

संस्कृत

गामाविश्य च भूतानि धारयाम्यहमोजसा । पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः ॥

gām āviśya ca bhūtāni dhārayāmy aham ojasā puṣṇāmi cauṣadhīḥ sarvāḥ somo bhūtvā rasātmakaḥ

अनुवाद

मैं पृथ्वी में प्रवेश करके अपने ओज से सब प्राणियों को धारण करता हूँ, और रसमय सोम (चन्द्रमा) बनकर सभी वनस्पतियों का पोषण करता हूँ।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

अंतर्व्याप्ति की सूची को आगे बढ़ाते हुए, यह श्लोक कृष्ण को मिट्टी में व्याप्त जीवन-ऊर्जा में और सोम में स्थित करता है। सोम वह पदार्थ है जो वनस्पति से और चंद्रमा से जुड़ा है और वनस्पतियों का पोषण करता है। अनुवादक ने स्वयं अपनी पाद-टिप्पणी में यह वास्तविक अनिश्चितता बताई है कि यहाँ “रसात्मकः” का अर्थ “चंद्रमा बनकर” है या केवल “रस बनकर”। इस अस्पष्टता को बनावटी ढंग से सुलझाने के बजाय बनाए रखना उचित है, क्योंकि यह अनुवाद की भूल नहीं, बल्कि परम्परा में व्याख्या को लेकर वास्तविक मतभेद को दर्शाती है। यहाँ विभूति खेती-बाड़ी का रूप ले लेती है: कृष्ण पृथ्वी में वह ओज (जीवन-शक्ति) हैं जो प्राणियों को धारण करता है, और चंद्रमा में वह रस (सार, तत्व) हैं जो फ़सलों को पुष्ट करता है। गीता 7.7 का अमूर्त “मैं सबको धारण करता हूँ” यहाँ मिट्टी और चाँदनी के रूप में साकार हो जाता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

gām āviśya ca bhūtāniगां आविश्य च भूतानि
और पृथ्वी में प्रवेश करके प्राणियों को (gām + āviśya + ca + bhūtāni)
dhārayāmy aham ojasāधारयांय् अहं ओजसा
मैं अपने ओज से धारण करता हूँ (dhārayāmi + aham + ojasā)
puṣṇāmi cauṣadhīḥ sarvāḥपुष्णामि चौषधीः सर्वाः
और सब वनस्पतियों का पोषण करता हूँ (puṣṇāmi + ca + oṣadhīḥ + sarvāḥ)
somo bhūtvā rasātmakaḥसोमो भूत्वा रसात्मकः
रसमय सोम बनकर (somaḥ + bhūtvā + rasa-ātmakaḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The translator’s own footnote admits real uncertainty about whether “rasātmakaḥ” means Krishna “becoming the moon” or simply “becoming sap” — and that ambiguity is worth preserving rather than resolving artificially, since it reflects genuine interpretive disagreement rather than sloppy translation. Sometimes the more honest scholarly move is naming exactly where the uncertainty sits instead of picking a confident answer just to close the sentence.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप सचमुच नहीं जानते कि आपने कोई निर्णय क्यों लिया या किसी बात पर वैसी प्रतिक्रिया क्यों दी, तो केवल मन को तसल्ली देने के लिए अपने बारे में कोई आत्मविश्वास भरी कहानी गढ़ने के बजाय उस अस्पष्टता को सीधे-सीधे स्वीकार करना अधिक ईमानदारी है। साफ़ शब्दों में कही गई अनिश्चितता झूठी स्पष्टता से बेहतर है।

व्यावसायिक

  • जब उपलब्ध आँकड़ों के आधार पर किसी समस्या का मूल कारण या कोई आवश्यकता सचमुच अस्पष्ट हो, तो किसी एक व्याख्या पर झूठा आत्मविश्वास गढ़ने के बजाय उस अस्पष्टता को पोस्टमॉर्टम या स्पेसिफ़िकेशन में स्पष्ट रूप से दर्ज करें। अगले पाठक के लिए ईमानदार अनिश्चितता एक सुघड़ अनुमान से अधिक उपयोगी होती है।

परिवार और समाज

  • जब आप वास्तव में नहीं जानते कि आपके किसी करीबी ने वैसी प्रतिक्रिया क्यों दी, तो केवल असहजता दूर करने के लिए कोई आत्मविश्वास भरी व्याख्या गढ़ने के बजाय यह खुलकर कह देना ठीक है। अस्पष्टता को ईमानदारी से स्वीकार करना आम तौर पर रिश्ते के लिए बेहतर होता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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