संस्कृत
तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात् । भवामि न चिरात्पार्थ मय्यावेशितचेतसाम् ॥
teṣām ahaṃ samuddhartā mṛtyusaṃsārasāgarāt bhavāmi na cirāt pārtha mayy āveśitacetasām
अनुवाद
हे पार्थ, जिनका चित्त मुझमें लगा हुआ है, उनका मैं मृत्युरूपी संसार-सागर से शीघ्र ही उद्धार करने वाला बनता हूँ।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
“न चिरात्” — बिना विलम्ब के — यही अभी बताए गए अभ्यास का फल है, और यह श्लोक 5 में अव्यक्त मार्ग की “कठिनाई” (क्लेश) के जान-बूझकर रखे गए विरोध के रूप में पढ़ा जाता है। कृष्ण भक्ति के पक्ष में एक के बाद एक तर्क जोड़ते जा रहे हैं: यह न केवल अपनाने में सरल है, बल्कि अपने फल में भी शीघ्र है। न चिरात् — “शीघ्र ही” — को जान-बूझकर गीता 12.5 के क्लेश, यानी “कष्ट”, के सामने रखा गया है। कृष्ण भक्ति के पक्ष में तर्क जोड़ते जा रहे हैं: भक्ति न केवल आरम्भ करने में सरल है, बल्कि अपने फल में भी शीघ्र है, और उबारने का काम कृष्ण स्वयं करते हैं — समुद्धर्ता।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- teṣām ahaṃ samuddhartāतेषां अहं समुद्धर्ता
- उनका मैं उद्धार करने वाला (teṣām + aham + samuddhartā)
- mṛtyusaṃsārasāgarātमृत्युसंसारसागरात्
- मृत्युरूपी संसार-सागर से (mṛtyu-saṃsāra-sāgarāt)
- bhavāmi na cirāt pārthaभवामि न चिरात् पार्थ
- शीघ्र ही होता हूँ, हे पार्थ (bhavāmi + na + cirāt + pārtha)
- mayy āveśitacetasāmमय्य् आवेशितचेतसां
- जिनका चित्त मुझमें लगा है, उनका (mayi + āveśita-cetasām)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Having already made devotion the easier path in verse 5, Krishna adds a second, unrelated claim here — it’s also faster. The two virtues don’t have to travel together, and when they do, it’s worth noticing rather than assuming that a path can only be legitimate if it’s also the harder, slower one.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब कोई आदत या अभ्यास निभाने में आसान भी निकले और जल्दी परिणाम भी दिखाए, तो इस मेल को उसे जारी रखने का सच्चा संकेत मानें — यह न मान लें कि कठिन और धीमा रास्ता अपने आप ही अधिक उचित है।
व्यावसायिक
- जब आप ईमानदारी से कह सकें कि कोई प्रस्तावित समाधान बनाने में सरल भी है और जल्दी पूरा करके सौंपा भी जा सकता है, तो दोनों बातें एक साथ कहें — इस भावना में बहकर किसी योजना की गति को कम करके न बताएँ कि "असली" समाधान तो कठिन ही होना चाहिए।
परिवार और समाज
- जब आपको किसी का साथ देने का कोई सरल तरीका मिले जो उसकी मदद जल्दी भी करे — कभी-कभार लंबी बातचीत के बजाय रोज़ थोड़ी देर हालचाल पूछना — तो भरोसा रखें कि यहाँ आसान होने और अधिक असरदार होने में कोई टकराव नहीं है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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