संस्कृत
मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धिं निवेशय । निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वं न संशयः ॥
mayy eva mana ādhatsva mayi buddhiṃ niveśaya nivasiṣyasi mayy eva ata ūrdhvaṃ na saṃśayaḥ
अनुवाद
अपना मन मुझमें ही लगाओ, अपनी बुद्धि मुझमें ही स्थिर करो। इसके बाद तुम मुझमें ही निवास करोगे, इसमें कोई संशय नहीं है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
इस अध्याय का सबसे सीधा आदेश — बिना किसी शर्त के, एक सीधा-सादा आदेश। कृष्ण इसे साफ़ शब्दों में कहते हैं और फिर, यह मान लेने के बजाय कि इसे पूरा किया जा सकता है, तुरंत श्लोक 9 में एक विकल्प रख देते हैं। “यह रहा निर्देश” और उसके तुरंत बाद “और यदि यह न हो सके” — यह जोड़ी इस अध्याय की सबसे विशिष्ट अलंकारिक चाल है। बिना किसी शर्त का सीधा आदेश — और फिर, यह मान लेने के बजाय कि यह संभव है, कृष्ण तुरंत गीता 12.9 में एक विकल्प रख देते हैं। “यह रहा निर्देश” और उसके तुरंत बाद “और यदि यह न हो सके” — यही इस अध्याय की विशिष्ट चाल है, और इस अलंकार की सीढ़ी का पहला पायदान।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- mayy eva mana ādhatsvaमय्य् एव मन आधत्स्व
- अपना मन मुझमें ही लगाओ (mayi + eva + manaḥ + ādhatsva)
- mayi buddhiṃ niveśayaमयि बुद्धिं निवेशय
- अपनी बुद्धि मुझमें स्थापित करो (mayi + buddhim + niveśaya)
- nivasiṣyasi mayy evaनिवसिष्यसि मय्य् एव
- तुम मुझमें ही निवास करोगे (nivasiṣyasi + mayi + eva)
- ata ūrdhvaṃ na saṃśayaḥअत ऊर्ध्वं न संशयः
- इसके बाद — इसमें कोई संशय नहीं (ataḥ + ūrdhvam + na + saṃśayaḥ)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
This verse gives no qualification, no fallback, no acknowledgment that it might be hard — and the very next verse immediately supplies one anyway. Read together, the pair models something rare: stating a full, uncompromised ideal without flinching, and then, in the same breath, refusing to let anyone be shut out by it.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप अपने लिए किसी लक्ष्य का पूरा, बिना किसी समझौते वाला रूप तय करें, तो उसी समय उसका विकल्प वाला रूप भी लिख लें, बाद में पीछे हटने के रूप में नहीं — जिस आदर्श के साथ कोई विकल्प नहीं होता, वह पहली बार चूकते ही पूरी तरह छोड़ दिया जाता है।
व्यावसायिक
- जब आप अपनी टीम के लिए कोई ऊँचा लक्ष्य तय करें, तो उसी घोषणा में स्वीकार्य विकल्प-स्तर भी बता दें — दोनों को एक साथ कहने से, लक्ष्य कठिन साबित होने पर भी वह हतोत्साहित करने के बजाय प्रेरक बना रहता है।
परिवार और समाज
- जब आप अपने किसी करीबी से किसी व्यवहार का आदर्श रूप माँगें — पूरा धैर्य, रोज़ का संपर्क — तो उसी बातचीत में स्वीकार्य विकल्प भी सामने रख दें, ताकि एक बार चूक जाना उन्हें पूरी विफलता न लगे।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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